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Saturday, July 27, 2013

The Unpredictable Game




In everyday’s life we cannot predict what will happen in the next second and to ensure that everything in life will go in the right direction we look forward to tarot card,Kundali,Astro to know our future. Due to this we are not able to find out 100% but at some percentage of our future happenings. In this 50% things are correct and 50% are wrong. That means probability of happening all things right or wrong is equal.
There are lot of fights and riots happens between people of same or opposite community of a country but one thing that unite them  is “SPORTS”.

When it comes to sports lot of people in different countries acts like astrologers and everyone give their prediction about the outcome or static’s of the game. There are lots of sports in which prediction of people goes right but there is a game in which to predict the outcome or statics of the game is very difficult. The team which looks strong before the game can play like minnows and team who are on the door of losing the match stands at the winning side in the end.
Yes this is the beauty of this game called “CRICKET”. It is an Unpredictable Game.  Teams can get 50 runs in 4 over’s and not able to score 10 off just 2 over’s.

In the past lots of matches proved that this is an Unpredictable Game. Whether it’s the first ODI in the series when Srilanka Toured Australia in 2010 in which Srilanka had lost 8 wickets at just 107 runs needed 240 runs needed to win the match. Everyone at the ground thought that the match had been over in few overs but, Unpredictable Nature of this game had something else in its mind. After lost 8 wickets Malinga came to the crease and to bat with Mathews who was fighting to get the target in 50 over’s. Task was difficult but not impossible and both Mathews and Malinga started their journey towards the success. They ended up on the winning side by 1 wicket. Angelo Mathews scored brilliant 77 not out and Malinga never thought that he had scored this much runs in an inning. He scored 56 off just 48 balls.

This was not the only match which proves the Unpredictable Nature of this Game. A match between Australia and India in Titan Cup (1996) was held at M.Chinnaswamy Stadium Bangalore (no Bengluru) where both of them made a partnership of 52 runs which won the game for India. When Kumble came to the crease India was 167/8 needed pile of runs to get across the rope happily. Both of them played brilliantly and took the match away from Australia and proved that it is an Unpredictable Game.
Cricket is always a game with lots of action, drama and emotion. It brings joy and happiness, sometime emotions are overflows but end result is always good. Fan’s of this game makes a player “GOD OF CRICKET” one day and will criticize him another day. That is also an Unpredictability of this game.
Some time even toss decides the fate of the game and sometime result is not clear till the last ball bowls.
“The Unpredictable Game “will bring you the update of the cricket, match analysis and interesting things happening in cricket around the globe.
check out my new website here :- http://theunpredictablegame.org/

Tuesday, March 19, 2013

That’s out of the Ground



 In cricket quality batsmen were always treated with respect. All the batsmen can broadly be divided into two categories: one is attacking batsmen and another one is technical batsmen. As cricket is getting older players of technical categories became lesser now a days. ODI and now T-20 helped the attacking category to grow at faster rate. Especially T-20 worked like Borunvita to attacking category. Sanath Jayasuriya, Chris Gayle, Virendar Sehwag, Brendon Mccullum, Kieron Pollard, Tillakaratne Dilshan, Herschelle Gibbs, David Warner and Shahid Afridi are the kings of this category. All this players are the brand ambassadors of this category. Pitch condition, opponent and match condition doesn’t hassle them at all. Their first and last catchword is to hit the ball hard. From the above list of players there is a player for whom this catchword is his life. 

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Monday, January 7, 2013

मिस्टर क्रिकेटर :माइकल हसी


क्रिकेट के खेल मे फिनिशर की भुमिका हमेशा महत्व्पूर्ण रहती है.फिनिशर वो खिलाडी रहता है जो मिडिल आर्डर मे खेलता हो और जब टीम रनो का पिछा कर रही हो तो मैच को टीम की झोली मे डालकर ही मैदान से वापस आये.

भारत के लिये पहले ये भुमिका कभी कपिल देव,जडेजा और रोबिन सिह निभाते थे तो अब धोनी,युवराज और रैना ने ये जिम्मेदारी ले ली है.रोशन महानामा,कोलिंगवूड और बेवन इस जिम्मेदारी को निभाने मे सर्वश्रेष्ठ थे.

आस्ट्रेलिया के लिये माइकल बेवन ने कई सालो तक फिनिशर की भुमिका मे रहते हुये आस्ट्रेलिया को जीत दिलाई है.
उनके जाने के बाद कुछ सालो तक बीच बीच मे एक दो खिलाडी आये परंतु बेवन की कमी को पूरा नही कर पाये.

1 फरवरी 2004 को आस्ट्रेलिया को एक ऐसा खिलाडी मिला जिसने लगभग बेवन की कमी को पूरा कर दिया. वो बाये हाथ से खेलता है, बेवन की तरह शानदार फिल्डिंग करता है.बस बेवन की तरह गेंदबाजी नही कर पाता है.

मिस्टर क्रिकेटर के नाम से मशहूर माइकल हसी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मे 28 साल की उम्र मे अपना डेब्यू भारत के खिलाफ़ एकदिवसीय क्रिकेट से किया था.आस्ट्रेलियाई क्रिकेट मे बहुत कम खिलाडीयो को कम उम्र मे टीम मे खेलने को मिलता है. परंतु माइकल हसी को तो ये मौका काफी देर से मिला उन्होने 30 साल की उम्र मे वेस्टइंडीज़ के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट मे डेब्यू किया था.

अपना पहला टेस्ट मैच खेलने से पहले माइकल हसी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट मे वेस्टर्न आस्ट्रेलिया की तरफ से खेलते हुये 15331 रन बनाये थे. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मे इतनी देर से डेब्यू करने वाले माइकल हसी ने आते ही शानदार खेल दिखाया और अपने दुसरे ही टेस्ट मैच मे शानदार शतक लगा दिया.

नाक पर हमेशा सन्स क्रिम लगाकर खेलने वाले, शांत स्व्भाव के माइकल हसी जब एक बार पिच पर टीक जाते थे तो उन्हे आऊट करना बहुत मुश्किल होता था. स्व्भाव से शांत हसी के खेल मे काफी तेजी थी. अगर चौके और छ्क्के नही लगते थे तो वो तेजी से दौड कर कई सारे रन बटोर लेते थे.

माइकल हसी एक फिनिशर थे और नबंर 5 पर आकर आस्ट्रेलिया की पारी को सम्भाल भी लेते थे और गती भी देते थे. टेलेंडर्स के साथ किस तरह खेला जाता है ये उनसे हर किसी को सिखना चाहिये और इसकी मिसाल उन्होने कई बार दी है. साऊथ अफ्रिका के खिलाफ 2005 मे उन्होने अपनी जमीन पर ग्लैन मैक्ग्राथ के साथ 10वे विकेट के लिये 107 रनो की साझेदारी की थी.अगले साल 2006 मे उन्होने बांग्लादेश के साथ उन्ही की जमीन पर जैसन गिलेस्पी के साथ शानदार 320 रनो की साझेदारी की थी जिसमे माइकल हसी ने 182 रन बनाये थे जो उनके टेस्ट करियर का सर्वाधिक स्कोर है.

सबसे कम समय मे 1000 टेस्ट रन बनाने का रिकार्ड भी उनके ही नाम है उन्होने 18 अप्रैल 2006 को सिर्फ 166 दिनो मे 1000 टेस्ट रन बनाये थे.

माइकल हसी का निक नेम हस है परंतु उनके क्रिकेट ज्ञान के कारण उन्हे मिस्टर क्रिकेटर कहा जाता है.माइकल हसी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट मे आने से पहले साईंस टीचर बनने के लिये काफी पढाई की थी. 

श्रीलंका के खिलाफ हुई सिरीज मे 3 जनवरी 2013 को शुरु हुये अंतिम टेस्ट मैच के बाद उन्होने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया है.

185 एकदिवसीय मैचो मे उन्होने 48.15 की औसत से 5442 रन बनाये है.जिसमे 3 शतक और 39 अर्धशतक बनाये है.


उन्होने 79 टेस्ट मैचो मे मे 51.52 की औसत से 6235 रन बनाये है. जिसमे 19 शतक और 29 अर्धशतक शामिल है.
माइकल हसी को हमेशा उनके शानदार खेल और फिल्डिंग के लिये जाना जायेगा. साथ ही एक ऐसे खिलाडी के तौर पर भी जो आस्ट्रेलिया की ओर से खेला परंतु फिर भी किसी भी तरह के विवादो मे नही फसा था.

Tuesday, December 25, 2012

अब बस सफेद जर्सी मे दिखेंगे

तेंडुलकर ने क्रिकेट को भारत मे एक धर्म बना दिया और भारत की जनता ने उन्हे इस खेल का भगवान बना दिया है.कई सालो तक भारत मे लोग अपने टी.वी बंद कर देते थे जब सचिन आऊट हो जाते थे.





अपने पहले दो एकदिवसीय मैच मे उनके बल्ले से कोई रन नही निकला पर फिर भी उन्होने हार नही मानी.न्यूजीलैंड के खिलाफ एकदिवसीय मैच मे जब पहली बार पारी की शुरुवात करने का मौका मिला तो उन्होने उस मौके का भरपूर लाभ उठाया और सिर्फ 49 गेंदो पर शानदार 82 रन बना डाले. एकदिवसीय क्रिकेट मे अपना पहला शतक उन्होने 79 मैचो के बाद बनाया. परंतु उस शतक के पहले ही उनमे एक महान बल्लेबाज़ की छवि उनमे नज़र आने लगी थी.

सचिन रमेश तेंडुलकर जी हा यही नाम है उस महान बल्लेबाज़ का
. अपने 23 साल के एकदिवसीय क्रिकेट के  करियर मे सचिन ने बल्लेबाज़ का हर रिकार्ड अपने नाम किया है.सबसे ज्यादा शतक हो ,सबसे ज्यादा रन या सबसे ज्यादा मैच हर जगह सचिन का ही नाम है. सचिन का खेलने का अंदाज़ बेखौफ है. जब सचिन ने एकदिवसीय मैचो मे बल्लेबाज़ शुरु की तो उन्होने एक नये अंदाज़ मे खेलने का तरीका दिखाया .तकनीक के जरीये किस तरह से तेजी से रन बनाये जा सकते है.

सचिन तेंडुलकर पर हमेशा आरोप लगता रहा है के जब कभी वो शतक बनाते है टीम हार जाती है. लेकिन शायद ऐसा कहने वाले और उनकी बातो पर विश्वास करने वालो ने कभी आकडो पर गौर नही करा है. सचिन के 49 शतक मे से 33 शतक भारत की जीत मे शामिल थे.
अपने पहले ही दौरे पर एक शो मैच मे जब सचिन ने मुश्ताक अहमद की गेंद पर छ्क्के जडे.तो पाकिस्तान के अब तक के उम्मदा लेग स्पिनर अब्दुल कादिर ने कहा –“ बच्चो को क्या छ्क्के मार रहे हो, हमारी गेंद पर मार के बताओ”. सचिन ने कादिर के अगले ही ओवर मे 4 छ्क्के जड दिये.सचिन ने छ्क्के जडने के पहले ना बाद मे कादिर को कुछ कहा. बस अपने बल्ले से जवाब देते रहे. ये सचिन की एक शानदार खूबी है. वो कभी भी शब्दो से नही अपने बल्ले से प्रहार करते है. सचिन ने उस मैच मे सिर्फ 18 गेंद पर 53 रन बनाये थे और वो मैच सिर्फ 20 ओवर का था. अगर वो एक अंतरराष्ट्रिय मैच होता तो ये पारी रिकार्ड के पन्नो मे स्वर्णिम अक्षरो मे लिखी जाती.

सचिन ने दुनिया के हर गेंदबाज़ का सामना किया, किसी ने उन्हे अपनी गती से, किसी ने स्पिन से तो किसी ने उन्हे उकसा के आऊट करने की कोशिश की, लेकिन मास्टर बलास्टर ने सबको चित कर दिया.अपने करियर मे सचिन को सिर्फ आस्ट्रेलिया के ग्लैन मैग्राथ की गेंदबाजी खेलने मे परेशानी आयी और ये उन्होने खुद एक बार कहा था.शेन वार्न के तो वो सपने आने लगे थे.
शारजाह मे लगाये वो 2 शतक आज भी हर क्रिकेट प्रेमी के जेहन मे है.
अकेले दम पर सचिन ने भारत को फाईनल मे पहुचाया और फिर फाईनल मे फिर से शतक लगाकर भारत को कप जीता दिया.
सचिन ना सिर्फ बल्लेबाजी मे बल्कि गेंदबाजी और क्षेत्ररक्ष्ण मे उम्मदा प्रदर्शन करते है. आज भी कोई भी बल्लेबाज़ चाहे वो युवा क्यो ना हो सचिन के थ्रो पर अतिरिक्त रन नही लेता है. गेंद्बाजी मे वो स्विंग भी कराते है तो कभी लेग स्पिन और कभी आफ स्पिन भी करवा देते है. कटक मे आस्ट्रेलिया के खिलाफ़ उन्होने 5 विकेट भी लिये थे और मैच को आस्ट्रेलिया की पकड से छिन लिया था.

सचिन एक महान बल्लेबाज है, पूरी दुनिया ऐसा मानती है. कुछ लोग कहते थे के सचिन उम्मदा बल्लेबाज़ है पर महान नही.
लेकिन उन लोगो के शक को “सर डान ब्रैडमेन “
अपनी पत्नी से कहा था “ये लडका तो मेरे जैसा खेलता है”.

सचिन का एक सपना था.भारतीय टीम को विश्व कप जीताना और 2 अप्रैल 2011 को उनका ये सपना भी पूरा हो गया.सचिन की आंखो मे उस दिन खुशी के आसू थे.
सचिन ने बडे ही सादगी भरे अंदाज़ मे एकदिवसीय क्रिकेट से सन्यास लिया है. सबका कहना है के अगर सचिन एक मैच पहले बता देते तो उन्हे मैदान मे सम्मान के साथ विदा करते. परंतु सचिन को ये सब का मोह नही है. वो तो बस क्रिकेट से प्यार करते है और अभी ये प्यार सिर्फ एकदिवसीय क्रिकेट से कम हुआ है. टेस्ट मे सफेद जर्सी मे भारत का ये शेर अभी भी जवान है.